मेरा नाम सुनीता है। उमर, लगभग ३० साल, तीन बच्चें हैं मेरे -- दो लड़कियाँ, १७ और १४ साल की और एक लड़का, १० साल का। आज मेरी फिर पिटाई हुई। मैंने पैसे देने से मना जो कर दिया था। फिर दोबारा मारा, क्योंकि मैं अपनी छोटी बेटी को बचाने की कोशिश कर रही थी। उसकी गलती नही थी, वह बेचारी तो मुझे बचा रही थी... अपने पापा से।
मेरा पति रोज़ पीता है, कोई नौकरी नही है और दूसरी औरत भी कर रखी है उसने... ख़ुद तो कुछ कमाता नही है, और जो मैं घर लाती हूँ, उसे भी दूसरी पर गवारा करता है। बहुत परेशान हूँ दीदी। आज सवेरे जब मैंने पैसे देने से मन किया, तो लगा मारने मुझे। रोज़ ही की बात है, किसी न किसी बहने से मारता है। छोटी से देखा न गया, बीच में कूद पड़ी और बोली, "पापा, मम्मी को न मारो तुम..." कल रात को भी काफ़ी मारा था उसने, लातों से भी, सो छोटी को लगा की मम्मी मर जायेगी। बेटी हैना, सोचती है मेरे बारे मैं... दो साल पहले, जब मुझे पता चला था की इसने दूसरी औरत रखी हुई है, तो दिल को ऐसा धक्का लगा की ऑपरेशन करना पड़ा... तब से कमज़ोर रहती हूँ मैं।
पता है दीदी, जब छोटी ने बचने की कोशिश की, नो उसके पापा ने उसका गला ही दबा दिया। बोला, पहले तुझे चोदुन्गा, फिर तेरी बेटियों को। कैसे बोल सकता है कोई बाप ऐसी बातें, अपनी ही बेटियों के बारे में? ऐसे क्यों है वो हमारे साथ? अपने घर से थोड़े ही लायी थी बच्चों को? उसके भी तो बच्चे हैं यह, उसका हाड-मांस। और अपनी ही बेटियों के साथ वो... अगर उसने पी कर कुछ किया तो में क्या करूंगी दीदी? कहाँ जाऊँगी इन्हे लेकर?
पति को छोड़ भी तो नहीं सकती, दुनिया क्या बोलेगी? मेरी बेटियों का क्या होगा? कौन करेगा उनसे शादी? क्या उनकी ज़िंदगी भी मेरी तरह हो जायेगी? मेरा नाम सुनीता है। मेरी शादी १८-साल में हो गई थी। में एक बड़े घर में बर्तन मान्झ्ती हूँ। मैंने क्या गलती की है?
1 टिप्पणियाँ:
its chodoonga with a bada oo.
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